30+ बिना गलती की सजा शायरी, स्टेटस, कोट्स

बिना गलती की सजा शायरी


कभी कभी नाराजगी, दूसरों से ज्यादा खुद से होती है। 


बिना गलती की सजा शायरी


रोज़-रोज़ जलते हैं, फिर भी खाक़ न हुएं, अजीब हैं कुछ ख़्वाब भी, बुझ कर भी राख़ न हुएं। 


बिना गलती की सजा शायरी


तुम भी कर के देख लो मोहब्बत किसी से, जान जाओगे कि हम मुस्कुराना क्यों भूल गए। 

बिना गलती की सजा शायरी


बिना गलती की सजा शायरी


थक सा गया है मेरी चाहतों का वजूद, अब कोई अच्छा भी लगे तो… इज़हार नहीं करता। 


बिना गलती की सजा शायरी


बहुत करीब से अनजान बनकर गुजरा है वो, जो बहुत दूर से पहचान लिया करता था कभी। 


बिना गलती की सजा शायरी


मेरी यादों की कश्ती उस समुन्दर में तैरती है, जहां पानी सिर्फ और सिर्फ मेरी आँखों का होता हैं। 


बिना गलती की सजा शायरी


अजीब हैं मेरा अकेलापन न तो खुश हूँ, न ही उदास हूँ, बस खाली हूँ और खामोश हूँ। 


बिना गलती की सजा शायरी


कभी मुझ को साथ लेकर, कभी मेरे साथ चल कर, वो बदल गया अचानक, मेरी ज़िन्दगी बदल कर।


बिना गलती की सजा शायरी


जो सबको संभालने की कोशिश करता हैं न, उसको संभालना हर कोई भूल जाता हैं। 


बिना गलती की सजा शायरी


अगर न लिखते हम तो कबके राख हो गए होते, दिल के साथ साथ रूह में भी सुराख हो गए होते। 

Bina Galti ki Saza Shayari


Bina Galti ki Saza Shayari


अनपढ़ सा मैं, दो लफ्ज़ लिखने लगा हूं, मोहब्बत से मैं घायल बहुत हुआ हूं।


Bina Galti ki Saza Shayari


न अपने साथ हूँ, ना तेरे पास हूँ, बस कुछ दिनों से, बस यु ही उदास हूँ। 


बिना गलती की सजा शायरी


समझकर भी जो न समझे उसको समझाकर भी क्या होगा। 


अब न करेंगे, तुमसे कोई सवाल, काफी हक़ जताने लगे थे तुम पर, माफ करना यार


ठुकराया हमने भी बहुतों को है तेरी ख़ातिर, तुझसे फासला भी शायद उनकी बद-दुआओं का असर है।


गुजरती है जो दिल पर वो जुबान पर लाकर क्या होगा। 


जो जाहिर करना पड़े वो दर्द कैसा और जो दर्द ना समझ सके वो हमदर्द कैसा।


ये जो ख़ामोश से अल्फ़ाज़ लिखे है ना, पढ़ना कभी ध्यान से…चीखते कमाल के हैं। 


आज उसने एक और दर्द दिया हैं, तो मुझे याद आया, मैंने ही तो दुवाओ में, उसके सारे गम मांगे थे। 


जब भी उदास हो जाओ, तो रो दिया करो, चेहरे पढ़ना अब भूल गए हैं लोग। 

इसे भी पढ़े :-


Post a Comment

0 Comments